मेरे बच्चे को पेट दर्द है और आँखें पीली हैं — क्या यह कोलेडोकल सिस्ट हो सकती है?

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Dr. Tanmay Motiwala

pediatric surgeon raipur

Illustration of a liver and swollen bile duct for a choledochal cyst article

ज़्यादातर माता-पिता “कोलेडोकल सिस्ट” (choledochal cyst) शब्द पहली बार किसी स्कैन रिपोर्ट पर पढ़ते हैं। हो सकता है आपके बच्चे की आँखें बीच-बीच में पीली हो जाती हों, बार-बार पेट में दर्द होता हो, या पॉटी फीकी, चूने जैसी सफ़ेद आती हो। या फिर गर्भावस्था के स्कैन में बच्चे के लिवर के पास पानी से भरा एक छोटा बुलबुला दिखा हो। नीचे बताया गया है कि यह सिस्ट क्या है और क्यों इसे सिर्फ़ खाली (ड्रेन) करने के बजाय पूरी सिस्ट को निकालना ज़रूरी है। यह भी बताया गया है कि आपके बच्चे को जीवन भर जाँच क्यों करवानी होगी।

कोलेडोकल सिस्ट क्या है?

पित्त (bile) खाना पचाने वाला एक रस है जो लिवर में बनता है। यह एक नली से होकर आंत तक पहुँचता है, जिसे पित्त की नली (bile duct) कहते हैं। कोलेडोकल सिस्ट में इस नली का एक हिस्सा फूलकर एक थैली बन जाता है। इस थैली में पित्त जमा होता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। बच्चा इस समस्या के साथ ही पैदा होता है, हालाँकि इसके लक्षण बाद में दिख सकते हैं। यह बीमारी कम ही होती है: अमेरिका में लगभग 13,500 में 1 बच्चे को, और जापान में 1,000 में 1 बच्चे तक को। लड़कों के मुकाबले लड़कियों में यह 3 से 4 गुना ज़्यादा होती है।

यह क्यों होता है

पैंक्रियास (pancreas) एक ग्रंथि है जो पाचन रस बनाती है। आमतौर पर इसकी नली और पित्त की नली आंत में खुलने से ठीक पहले, बहुत थोड़ी दूरी पर ही आपस में मिलती हैं। कोलेडोकल सिस्ट वाले ज़्यादातर बच्चों में ये दोनों नलियाँ बहुत पहले ही मिल जाती हैं, और एक लंबा साझा रास्ता बन जाता है। इससे पैंक्रियास का रस उल्टा बहकर पित्त की नली में चला जाता है। समय के साथ यह रस नली की दीवार को चोट पहुँचाता है और कमज़ोर करता है, और नली फूल जाती है। कई सालों तक यह चोट चलती रहे तो सिस्ट की अंदरूनी परत असामान्य हो सकती है। वही असामान्य परत आगे चलकर कैंसर बन सकती है। इसीलिए सिस्ट को निकाला जाता है।

छोटे शिशुओं और बड़े बच्चों में यह कैसे दिखता है

लक्षण उम्र पर निर्भर करते हैं। एक साल से छोटे शिशुओं में आमतौर पर पीलिया (jaundice — त्वचा और आँखों का पीला होना), फीकी या मिट्टी जैसे रंग की पॉटी, और बढ़ा हुआ लिवर दिखता है। बड़े बच्चों में यह तकलीफ़ अक्सर रुक-रुक कर आती है। पीलिया आता-जाता रह सकता है, पेट में दर्द हो सकता है, या पित्त की नली में इन्फेक्शन के साथ बुखार आ सकता है (कोलेंजाइटिस — cholangitis)। पैंक्रियास में सूजन भी हो सकती है (पैंक्रियाटाइटिस — pancreatitis)। कई किताबों में दर्द, पीलिया और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में गाँठ — इन तीनों को “क्लासिक” लक्षण बताया गया है। असल में 100 में से लगभग 20 बच्चों में ही ये तीनों लक्षण एक साथ होते हैं। यानी बच्चे को बिना किसी गाँठ के, या इनमें से सिर्फ़ एक लक्षण के साथ भी सिस्ट हो सकती है। कुछ सिस्ट अब किसी भी लक्षण से पहले ही गर्भावस्था या नवजात के अल्ट्रासाउंड में दिख जाती हैं।

डॉक्टर इसकी पुष्टि कैसे करते हैं

पहली जाँच आमतौर पर अल्ट्रासाउंड (ultrasound) होती है। यह आसान है, इसमें दर्द नहीं होता, और यह ज़्यादातर सिस्ट पकड़ लेती है (100 में से 71 से 97 तक)। सिस्ट का पूरा नक्शा देखने की सबसे अच्छी जाँच MRCP है, जो पित्त की नली और पैंक्रियास की नली का एक ख़ास MRI स्कैन है। MRCP लगभग हर सिस्ट पकड़ लेता है (100 में से 90 से 100 तक) और इसमें कोई रेडिएशन नहीं होता। जब मैं कोलेडोकल सिस्ट वाले किसी बच्चे को देखता हूँ, तो ऑपरेशन की योजना बनाने से पहले MRCP से ठीक-ठीक देखता हूँ कि दोनों नलियाँ कहाँ मिल रही हैं। खून की जाँच से लिवर और पैंक्रियास को जाँचा जाता है। कुछ बच्चों को ऑपरेशन से पहले विटामिन K भी देना पड़ता है, क्योंकि पित्त का बहाव रुकने से खून जमने पर असर पड़ सकता है।

कोलेडोकल सिस्ट के प्रकार

पित्त की नलियों का कौन-सा हिस्सा फूला है, इसके हिसाब से डॉक्टर कोलेडोकल सिस्ट को पाँच मुख्य प्रकारों में बाँटते हैं। टाइप I सबसे आम है, 100 में से 90 से 95 सिस्ट इसी प्रकार की होती हैं। टाइप I में लिवर के बाहर वाली मुख्य पित्त नली फूली होती है। बाकी प्रकार कम मिलते हैं, और कुछ में लिवर के अंदर की छोटी पित्त नलियाँ भी शामिल होती हैं। प्रकार इसलिए मायने रखता है क्योंकि इसी से तय होता है कि ठीक-ठीक कौन-सा ऑपरेशन होगा और बाद में बच्चे पर कितनी नज़दीकी से नज़र रखनी होगी।

पूरी सिस्ट निकालना क्यों ज़रूरी है

सिस्ट को खाली कर देना काफ़ी नहीं है। इसे निकालना ही होगा। पहले कुछ सर्जन सिस्ट को सीधे आंत में खाली कर देते थे। यह तरीका अब छोड़ दिया गया है। खाली करने से सिस्ट की ख़राब परत अंदर ही रह जाती है, और उस परत में आगे चलकर कैंसर का ख़तरा रहता है। इससे बार-बार इन्फेक्शन भी होता रहता है। आम प्रकारों (टाइप I और IV) में सामान्य इलाज यह है कि लिवर के बाहर की पूरी फूली हुई पित्त नली निकाल दी जाए। टाइप IV में कुछ सिस्ट लिवर के अंदर होती हैं और हमेशा निकाली नहीं जा सकतीं, इसीलिए इनमें फॉलो-अप और भी ज़रूरी है। इसके बाद सर्जन स्वस्थ पित्त नली को बच्चे की अपनी छोटी आंत के एक हिस्से से जोड़ देते हैं, ताकि पित्त फिर से आसानी से बह सके। डॉक्टर पित्त के इस नए रास्ते को रू-एन-वाई हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी (Roux-en-Y hepaticojejunostomy) कहते हैं। जहाँ सर्जन को इस ऑपरेशन का अनुभव हो, वहाँ यह अब ज़्यादा से ज़्यादा दूरबीन (laparoscopic) सर्जरी से किया जा रहा है। कम मिलने वाले प्रकारों का इलाज अलग तरह से होता है। कुछ में छोटा ऑपरेशन ही काफ़ी होता है, और कुछ का इलाज एंडोस्कोप (endoscope — एक पतली कैमरा नली) से किया जाता है। लिवर के अंदर होने वाले एक बहुत ही कम मिलने वाले प्रकार में लिवर का एक हिस्सा निकालना पड़ सकता है।

ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?

सर्जन इन सिस्ट को ऐसे ही नहीं छोड़ते। अगर सिस्ट गर्भावस्था के स्कैन में दिखी थी और आपका शिशु ठीक है, तो कुछ सर्जन पहले कुछ महीनों में ऑपरेशन करते हैं। कुछ सर्जन जीवन के पहले साल के अंदर ऑपरेशन की योजना बनाते हैं। दोनों का मक़सद लिवर को धीरे-धीरे ख़राब होने (स्कारिंग) से बचाना है। साथ ही पित्त की नली के इन्फेक्शन या सिस्ट के फटने को रोकना भी है। अगर आपके बच्चे में पहले से लक्षण हैं, तो सर्जन इंतज़ार नहीं करते, जल्दी ऑपरेशन करते हैं। कृपया बिना देर किए किसी पीडियाट्रिक सर्जन को दिखाएँ।

ऑपरेशन के बाद की ज़िंदगी

ज़्यादातर बच्चे ऑपरेशन के बाद अच्छे रहते हैं। फिर भी नीचे बताई गई समस्याएँ सालों बाद सामने आ सकती हैं। सबसे आम देर से होने वाली समस्या है पित्त नली और आंत के जोड़ पर सिकुड़न (स्ट्रिक्चर — stricture)। सिकुड़न से पित्त का बहाव धीमा हो सकता है और लिवर की नलियों के अंदर पथरी बन सकती है। ये पथरियाँ ऑपरेशन के 3 से 22 साल बाद तक कभी भी बन सकती हैं। कुछ बच्चों को बार-बार पैंक्रियाटाइटिस भी होता है। सिस्ट निकालने से कैंसर का ख़तरा बहुत कम हो जाता है, लेकिन पूरी तरह ख़त्म नहीं होता। यह बात ख़ास तौर पर उन प्रकारों में लागू होती है जिनमें लिवर के अंदर की नलियों में भी सिस्ट होती हैं। इन्हीं कारणों से फॉलो-अप जीवन भर चलना चाहिए, नियमित जाँच और स्कैन के साथ, भले ही बच्चा पूरी तरह ठीक महसूस करे।

हर माता-पिता को क्या जानना चाहिए

  • पीली आँखें, फीकी पॉटी या पेट दर्द — इनमें से कोई भी सिस्ट की ओर इशारा कर सकता है। तीनों लक्षण एक साथ आने का इंतज़ार न करें।
  • कैंसर के ख़तरे की वजह से सिस्ट को निकालना ही होगा, सिर्फ़ खाली करना काफ़ी नहीं
  • जिस स्वस्थ शिशु में स्कैन पर सिस्ट दिखी हो, उसे भी ऑपरेशन की ज़रूरत है — पहले कुछ महीनों में या पहले साल के अंदर।
  • जिस बच्चे में लक्षण हों, उसे बिना देर किए पीडियाट्रिक सर्जन को दिखाना चाहिए।
  • ऑपरेशन के कई साल बाद भी समस्याएँ आ सकती हैं, इसलिए जाँच जीवन भर करवानी है

डॉक्टर को कब दिखाएँ

अगर आपके बच्चे को पीली आँखें या त्वचा, फीकी या सफ़ेद पॉटी, या बुखार के साथ पेट दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। क्या गर्भावस्था या नवजात के स्कैन में लिवर के पास सिस्ट दिखी थी? तो जल्दी ही किसी पीडियाट्रिक सर्जन से मिलें, भले ही आपका शिशु स्वस्थ दिखता हो। जिस बच्चे का ऑपरेशन हो चुका है, उसका फॉलो-अप कभी नहीं छूटना चाहिए। अगर उसे फिर से पीलिया, बुखार या पेट दर्द हो, तो उसे भी जल्दी दिखाना चाहिए।

डॉ. तन्मय मोतीवाला रायपुर, छत्तीसगढ़ के बाल शल्य चिकित्सक हैं, जिन्होंने एम्स जोधपुर से प्रशिक्षण लिया है। वे छत्तीसगढ़ और मध्य भारत भर के कोलेडोकल सिस्ट और पित्त नली व लिवर की दूसरी समस्याओं वाले बच्चों का आकलन और इलाज करते हैं, जिसमें सिस्ट को पूरी तरह निकालना और लंबे समय तक फॉलो-अप शामिल है।

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📋 यह लेख डॉ. मोतीवाला की रायपुर में पीडियाट्रिक जनरल और एबडॉमिनल सर्जरी सेवाओं का हिस्सा है — इलाज की जाने वाली स्थितियों की पूरी सूची, क्या अपेक्षा करें, और बाल शल्य चिकित्सक को कब दिखाएँ, यह देखें।


संबंधित स्थितियाँ जो माता-पिता अक्सर पढ़ते हैं

अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं? डॉ. तन्मय मोतीवाला रायपुर, जगदलपुर और राजिम में परामर्श देते हैं। अपॉइंटमेंट बुक करें या कॉल करें +91 83190 84711

⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। हर बच्चे की स्थिति अलग होती है — तथ्य, संभावित परिणाम और प्रबंधन एक मामले से दूसरे मामले में काफ़ी भिन्न हो सकते हैं। कृपया अपने बच्चे के लिए विशिष्ट सलाह हेतु किसी योग्य बाल शल्य चिकित्सक से परामर्श लें।

स्रोत: Coran’s Pediatric Surgery (7th ed), Ch. 106 (Choledochal Cyst), Gonzales & Lee; Rob & Smith’s Operative Pediatric Surgery (7th ed).

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