बच्चों में कब्ज़: कारण, इलाज और डॉक्टर को कब दिखाएँ

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Dr. Tanmay Motiwala

pediatric surgeon raipur

Helping a constipated child: fiber, water, active play, and toilet routine

चिकित्सकीय समीक्षा: डॉ. तनमय मोतीवाला, MBBS, MCh (बाल शल्य चिकित्सा), AIIMS-प्रशिक्षित बाल शल्य चिकित्सक एवं मूत्र-रोग विशेषज्ञ | अंतिम समीक्षा: अप्रैल 2026 | पढ़ने का समय: 6 मिनट

माता-पिता को शायद ही किसी बात से इतनी चिंता होती है जितनी उस बच्चे को देखकर, जो असहज दिखता है, शौच जाने से इनकार करता है और पेट दर्द की शिकायत करता है। यदि आपके नन्हे ने कुछ दिनों से मल नहीं त्यागा है — या हर बार पॉटी पर बैठते ही रोता है — तो आप अकेले नहीं हैं। कब्ज़ (constipation) भारत में बाल क्लिनिक में बच्चे को लाने के सबसे आम कारणों में से एक है, और अच्छी खबर यह है: ज़्यादातर मामलों में इसका इलाज पूरी तरह घर पर ही हो जाता है।

यह लेख आपको बताता है कि क्या सामान्य है, क्या नहीं, और आपको रायपुर में बाल विशेषज्ञ को ठीक कब दिखाना चाहिए।

बच्चों में कब्ज़ क्या है?

कब्ज़ का सीधा अर्थ है कठोर मल त्यागना, सामान्य से कम बार त्यागना, या दर्द के साथ त्यागना। यह केवल इस बात का मामला नहीं है कि आपका बच्चा कितनी बार शौच जाता है — यह इस बात का मामला है कि यह प्रक्रिया कितनी आरामदायक है।

“सामान्य” क्या माना जाए, यह उम्र के साथ बहुत बदलता है:

  • नवजात (0–3 माह): हर बार दूध पिलाने के बाद से लेकर हर 3–4 दिन में एक बार तक — कुछ भी सामान्य हो सकता है, ख़ासकर स्तनपान करने वाले शिशुओं में।
  • छोटे बच्चे (1–3 वर्ष): आमतौर पर दिन में 1–2 बार, कभी-कभी हर 2 दिन में एक बार।
  • स्कूल जाने वाले बच्चे (4–10 वर्ष): ज़्यादातर बच्चे दिन में एक बार शौच जाते हैं।

जो बच्चा हर 3 दिन में बिना दर्द के नरम मल त्यागता है, वह कब्ज़ग्रस्त नहीं है। जो बच्चा हर दिन कठोर, दर्दनाक मल त्यागता है, वह है। असली बात मल की बनावट और आराम है, कैलेंडर नहीं।

कब्ज़ क्यों होती है?

भारतीय बच्चों में सबसे आम कारण आश्चर्यजनक रूप से सरल हैं:

  • कम रेशे (fibre) वाला आहार — बहुत ज़्यादा दूध, पॉलिश किया हुआ चावल, बिस्किट, और पर्याप्त फल, सब्ज़ियाँ व साबुत अनाज न होना
  • पर्याप्त पानी न पीना, ख़ासकर गर्मियों में या जब स्कूल में शौचालय जाने के मौके सीमित हों
  • रोक कर रखना — जिस बच्चे को एक बार दर्दनाक शौच हुआ हो, वह अक्सर दर्द से बचने के लिए मल रोक लेता है, जिससे अगला मल और भी कठोर हो जाता है (यह एक दुष्चक्र बन जाता है)
  • गाय का दूध ज़्यादा मात्रा में — जो बच्चे रोज़ 500 ml से अधिक गाय का दूध पीते हैं, उन्हें अक्सर कब्ज़ हो जाती है
  • स्कूल में शौचालय से बचना — भारतीय स्कूलों के शौचालय हमेशा बच्चों के अनुकूल नहीं होते, और कई बच्चे घर पहुँचने तक “रोक कर” रखते हैं
  • हाल का बदलाव — शहर बदलना, नया स्कूल शुरू करना, या यहाँ तक कि टॉयलेट ट्रेनिंग भी इसे भड़का सकती है

माता-पिता घर पर पहचान सकने वाले लक्षण

कब्ज़ पहचानने के लिए आपको डॉक्टर की ज़रूरत नहीं। इन पर ध्यान दें:

  • ऐसा मल जो कठोर कंकड़, गोलियों, या मोटे लट्ठे जैसा दिखे
  • मल त्यागते समय रोना या ज़ोर लगाना
  • टॉयलेट पेपर पर ताज़े खून की धारियाँ (छोटे-छोटे घाव, जिन्हें फिशर कहते हैं, से)
  • पेट दर्द जो आता-जाता रहता है, अक्सर शौच के बाद राहत मिलती है
  • भूख कम होना (खाने के समय ठीक पहले “मुझे नहीं खाना”)
  • अंडरवियर में मल के छोटे टुकड़ों से गंदगी — यह दरअसल लंबे समय से चली आ रही कब्ज़ का संकेत है, गंदी सफ़ाई का नहीं
  • बच्चे का फर्नीचर के पीछे छिपना, टाँगें आपस में भींचना, या पॉटी पर बैठने से इनकार करना

बाल शल्य चिकित्सक को कब दिखाएँ — ख़तरे के संकेत

ज़्यादातर कब्ज़ आपके पारिवारिक डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा संभाली जा सकती है। पर कुछ चेतावनी-संकेत ऐसे हैं जिनके लिए बाल शल्य चिकित्सक की जाँच ज़रूरी है:

  • ऐसा नवजात जिसने जन्म के 48 घंटों के भीतर मेकोनियम (meconium) (पहला मल) न त्यागा हो
  • शिशु या छोटे बच्चे में रिबन जैसा पतला मल
  • ठीक से न बढ़ना (failure to thrive) — आपके बच्चे का वज़न सही ढंग से नहीं बढ़ रहा
  • गंभीर पेट फूलना (कड़ा, सूजा हुआ पेट)
  • सभी घरेलू उपायों के बावजूद जीवन के पहले हफ़्तों से ही लगातार बनी रहने वाली कब्ज़
  • मल न त्यागने के साथ-साथ हरे या पीले पदार्थ की उल्टी
  • मल में खून के साथ कब्ज़ जो 1–2 दिन में न रुके

ये हिर्शस्प्रुंग रोग (Hirschsprung’s disease) (एक ऐसी जन्मजात स्थिति जिसमें आंत के एक छोटे हिस्से की तंत्रिकाएँ नहीं होतीं) या एनोरेक्टल विकृतियों (anorectal malformations) जैसी अधिक गंभीर स्थितियों के संकेत हो सकते हैं। दोनों का इलाज संभव है, पर इन्हें जल्दी बाल शल्य चिकित्सक की जाँच चाहिए।

यदि आपके बच्चे का पेट दर्द अचानक, तेज़ और गंभीर हो जाए, तो कृपया हमारी यह मार्गदर्शिका पढ़ें: बच्चों में अपेंडिसाइटिस: जब पेट दर्द को सर्जरी की ज़रूरत हो — अपेंडिसाइटिस अपने शुरुआती चरण में कभी-कभी कब्ज़ जैसा दिख सकता है।

कब्ज़ का इलाज कैसे होता है?

अच्छी खबर: लगभग 90% बच्चे घर पर किए गए सरल बदलावों से ठीक हो जाते हैं। हम हमेशा सबसे हल्के कदमों से शुरुआत करते हैं।

चरण 1 — आहार और तरल पदार्थ

  • रेशा बढ़ाएँ: पपीता, नाशपाती, सेब (छिलके सहित), आलूबुख़ारा (prunes), संतरा, अंकुरित अनाज, दाल, गेहूँ की रोटी
  • छोटे बच्चों में गाय का दूध घटाकर 300–500 ml/दिन करें
  • दिनभर पानी पर ज़ोर दें — 5 वर्ष के बच्चे के लिए कम से कम 4–6 गिलास
  • बिस्किट, सफ़ेद ब्रेड, पॉलिश किया हुआ चावल और पैकेट वाले स्नैक्स कम करें

चरण 2 — शौच की सही मुद्रा

यह भारत में सबसे कम इस्तेमाल की जाने वाली तरकीब है। बच्चे का शरीर उकड़ूँ बैठने (squatting) के लिए बना है, ऊँचे पश्चिमी शौचालय पर पैर लटकाकर बैठने के लिए नहीं। उनके पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखें ताकि उनके घुटने कूल्हों से ऊपर आ जाएँ। यह अकेला बदलाव मल त्यागना बेहद आसान बना देता है।

अपने बच्चे को हर भोजन के बाद 5 मिनट शौचालय पर बैठने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही कुछ न आए — इससे एक स्वस्थ आदत (reflex) बनती है।

चरण 3 — चिकित्सकीय मदद

यदि आहार में बदलाव से 2–3 सप्ताह में फ़र्क न पड़े, तो आपका डॉक्टर एक हल्का जुलाब (laxative) जैसे lactulose, polyethylene glycol (PEG/Movicol), या हल्के मल-नरमकारक (stool softeners) लिख सकता है। कृपया इनसे न डरें। जब किसी बाल विशेषज्ञ द्वारा लिखे जाएँ, तो ये लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए भी सुरक्षित हैं और इनकी लत नहीं लगती। लक्ष्य कई हफ़्तों तक मल को नरम रखना है ताकि बच्चा शौच जाने का डर खो दे।

चरण 4 — शल्य-चिकित्सकीय जाँच

सामान्य कब्ज़ के लिए सर्जरी की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है। इस पर तभी विचार किया जाता है जब कोई अंतर्निहित शारीरिक-रचना संबंधी समस्या हो (जैसे हिर्शस्प्रुंग रोग)। ऐसे मामलों में सर्जरी बहुत सफल होती है और बच्चे को सामान्य जीवन देती है। इस बारे में और पढ़ें: बच्चे को सचमुच सर्जरी की ज़रूरत कब होती है

भारतीय माता-पिता के मिथक — सच्चाई के साथ

मिथक 1: “एक चम्मच घी या तेल इसे ठीक कर देगा।”
इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि घी या तेल जमी हुई कब्ज़ को ठीक करते हैं। हालाँकि थोड़ी स्वस्थ वसा वाला संतुलित आहार अच्छा है, अकेला घी अटके हुए कठोर मल को नरम नहीं करेगा। इस नुस्ख़े के पीछे भागकर सही इलाज में देरी न करें।

मिथक 2: “मेरे बच्चे को कब्ज़ की वजह से बुख़ार है।”
कब्ज़ से बुख़ार नहीं होता। यदि आपके बच्चे को बुख़ार और कब्ज़ दोनों हैं, तो बुख़ार का कोई और कारण है जिसकी अलग से जाँच ज़रूरी है।

मिथक 3: “जुलाब ख़तरनाक होते हैं और इनकी लत लग जाती है।”
polyethylene glycol जैसे आधुनिक बाल जुलाब शरीर द्वारा अवशोषित नहीं होते और जब लिखे जाएँ तो महीनों तक भी सुरक्षित हैं। ये आपके बच्चे को लंबे समय के दर्द और फिशर के साथ तड़पने देने की तुलना में कहीं कम हानिकारक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मेरा 6 माह का स्तनपान करने वाला शिशु 5 दिन में केवल एक बार शौच जाता है। क्या यह कब्ज़ है?

शायद नहीं। केवल स्तनपान करने वाले शिशु सामान्य रूप से दिन में 8 बार से लेकर हफ़्ते में एक बार तक शौच जा सकते हैं, जब तक मल नरम है और शिशु आरामदायक है।

2. क्या मुझे अपने छोटे बच्चे को इसबगोल (psyllium husk) देना चाहिए?

केवल डॉक्टर की सलाह पर। पर्याप्त पानी के बिना बहुत ज़्यादा इसबगोल छोटे बच्चों में कब्ज़ को असल में और बिगाड़ सकता है।

3. मेरे बच्चे को मल त्यागते समय थोड़ा खून आता है। क्या यह गंभीर है?

चमकीले लाल खून की छोटी धारी आमतौर पर कठोर मल से हुए एक छोटे घाव (गुदा फिशर / anal fissure) से होती है। मल नरम होते ही यह ठीक हो जाता है। पर यदि खून ज़्यादा हो, गहरे रंग का हो, या 1–2 दिन से अधिक चलता रहे, तो डॉक्टर को दिखाएँ।

4. बचपन की कब्ज़ को पूरी तरह ठीक करने में कितना समय लगता है?

हल्के मामले 1–2 सप्ताह में सुधर जाते हैं। लंबे समय से चली आ रही कब्ज़ को आंत को पूरी तरह फिर से प्रशिक्षित करने और डर के चक्र को तोड़ने के लिए अक्सर 3–6 महीने के इलाज की ज़रूरत होती है।

5. क्या कब्ज़ वंशानुगत होती है?

कुछ पारिवारिक प्रवृत्ति होती है, पर जीन की तुलना में जीवनशैली और आहार कहीं अधिक मायने रखते हैं।

डॉ. तनमय मोतीवाला से परामर्श कब लें

यदि आपके बच्चे को आहार में बदलाव के बावजूद 4 सप्ताह से अधिक समय से कब्ज़ है, ऊपर बताए गए कोई भी ख़तरे के संकेत हैं, या कब्ज़ के साथ-साथ गंभीर पेट दर्द का एक दौरा पड़ा है — तो बाल शल्य चिकित्सक को दिखाने का समय आ गया है।

डॉ. तनमय मोतीवाला एक AIIMS-प्रशिक्षित बाल शल्य चिकित्सक एवं मूत्र-रोग विशेषज्ञ हैं, जो रायपुर, छत्तीसगढ़ के प्रमुख अस्पतालों में सेवाएँ देते हैं, और रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर, राजिम, जगदलपुर तथा पूरे राज्य के बच्चों का इलाज करते हैं।

📞 कॉल या व्हाट्सएप: +91 8319084711
📧 ईमेल: motiwalatanmay0@gmail.com
🌐 वर्तमान OPD उपलब्धता: होमपेज देखें drmotiwalapediatricsurgeonraipur.com

📋 यह लेख डॉ. मोतीवाला की रायपुर में बाल कोलोरेक्टल एवं एनोरेक्टल शल्य चिकित्सा (Pediatric Colorectal & Anorectal Surgery) सेवाओं का हिस्सा है — इलाज की जाने वाली सभी स्थितियाँ, क्या अपेक्षा करें, और बाल शल्य चिकित्सक को कब दिखाएँ, देखें।


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अपने बच्चे को लेकर चिंतित हैं? डॉ. तनमय मोतीवाला रायपुर, जगदलपुर और राजिम में परामर्श देते हैं। अपॉइंटमेंट बुक करें या कॉल करें +91 83190 84711

अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और किसी क्लिनिकल परामर्श का स्थान नहीं लेता। व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह के लिए कृपया किसी योग्य बाल शल्य चिकित्सक से परामर्श करें।


⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण: यह लेख पूरी तरह शैक्षिक एवं जागरूकता के उद्देश्य से दिया गया है। यहाँ दी गई जानकारी चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है, और इसे OPD या क्लिनिकल परामर्श नहीं माना जाना चाहिए। हर बच्चा अलग होता है — एक जैसे दिखने वाले लक्षणों के कारण अलग हो सकते हैं। यदि आपके बच्चे में यहाँ बताई गई कोई भी स्थिति या लक्षण हैं, तो कृपया जाँच और व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने नज़दीकी योग्य बाल शल्य चिकित्सक से व्यक्तिगत रूप से परामर्श करें। आपातकाल में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएँ।

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